
आज गोरखपुर जंक्शन का माहौल थोड़ा अलग है. प्लेटफॉर्म वही, ट्रेनें वही, लेकिन कमान पूरी तरह महिलाओं के हाथ में है.
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर पूर्वोत्तर रेलवे ने एक ऐसा प्रयोग किया है जो सिर्फ औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक साफ संदेश भी देता है — रेलवे का पहिया अब सिर्फ इंजन नहीं, बराबरी से भी चलता है।
आज स्टेशन पर ट्रेन ऑपरेशन से लेकर टिकट चेकिंग, आरक्षण, सफाई और सुरक्षा तक हर जिम्मेदारी महिला रेलकर्मियों के कंधों पर है. यानी अगर रेलवे एक विशाल मशीन है, तो आज उसकी हर लीवर और हर बटन महिला हाथों से संचालित हो रहा है.
गोरखपुर जंक्शन पर ‘महिला कमांड’
पूर्वोत्तर रेलवे ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक प्रतीकात्मक लेकिन प्रभावशाली कदम उठाया है. गोरखपुर जंक्शन की पूरी ऑपरेशनल व्यवस्था महिलाओं के जिम्मे सौंपी गई है.
स्टेशन के रूट रिले इंटरलॉकिंग पैनल से लेकर ट्रेन संचालन, टिकट बुकिंग, टिकट जांच, यात्री आरक्षण और प्लेटफॉर्म प्रबंधन तक सभी काम महिला कर्मचारी संभाल रही हैं.
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इसका उद्देश्य सिर्फ उत्सव मनाना नहीं बल्कि यह दिखाना भी है कि रेलवे जैसी जटिल व्यवस्था में महिलाएं किसी भी जिम्मेदारी को उतनी ही दक्षता से संभाल सकती हैं.
ट्रेन मेंटेनेंस से लॉन्ड्री तक महिलाओं की जिम्मेदारी
स्टेशन संचालन ही नहीं, तकनीकी मोर्चे पर भी महिलाएं आज पूरी तरह सक्रिय हैं. गोरखपुर के कोचिंग डिपो में महिला तकनीशियन ट्रेनों के अनुरक्षण का काम कर रही हैं. वहीं मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री में लिनेन की धुलाई और रखरखाव की जिम्मेदारी भी महिला कर्मचारियों के पास है.
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि भारतीय रेलवे में महिलाएं अब केवल प्रशासनिक पदों तक सीमित नहीं हैं. लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, सिग्नलिंग और तकनीकी कार्यों में भी उनकी भूमिका लगातार मजबूत हुई है.
वाराणसी और लखनऊ मंडल में भी महिला नेतृत्व
महिला दिवस का यह कार्यक्रम केवल गोरखपुर तक सीमित नहीं है. वाराणसी मंडल में सवारी ट्रेनों का संचालन महिला लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर द्वारा किया जा रहा है.
इसी तरह लखनऊ और इज्जतनगर मंडलों में भी महिला सशक्तीकरण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. रेलवे प्रशासन का मानना है कि ऐसे प्रयोग महिला कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हैं और नई पीढ़ी को भी प्रेरित करते हैं.

‘शक्ति वॉक’ और संगोष्ठी के जरिए संदेश
महिला दिवस पर गोरखपुर में कई प्रतीकात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं. सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम में सुबह ‘शक्ति वॉक’ का आयोजन किया गया, जिसमें महिला खिलाड़ी और महिला रेलकर्मी शामिल हुईं.
यांत्रिक कारखाना गोरखपुर में महिला सशक्तीकरण विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की जाएगी. इस दौरान इसी विषय पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा.
महिला यात्रियों के लिए सुरक्षा अभियान
रेलवे ने महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी विशेष पहल की है. रेलवे सुरक्षा बल का ‘मेरी सहेली’ अभियान इसके केंद्र में है. इस अभियान के तहत महिला आरपीएफ कर्मियों की टीम ट्रेनों में अकेले सफर कर रही महिलाओं से संपर्क करती है और उन्हें सुरक्षा से जुड़ी जानकारी देती है.
साथ ही रेलवे हेल्पलाइन 139 के बारे में भी जागरूकता फैलायी जाती है. इसके अलावा कई प्रमुख स्टेशनों पर महिला यात्रियों और महिला रेलकर्मियों के लिए ‘वात्सल्य रूम’ की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है.
भारतीय रेलवे में बदलती तस्वीर
कभी रेलवे में महिलाओं की मौजूदगी अपवाद मानी जाती थी. आज स्थिति उलट रही है. लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, सिग्नलिंग विशेषज्ञ, टिकट परीक्षक और तकनीकी स्टाफ जैसे पदों पर महिलाएं लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं.
गोरखपुर जंक्शन का यह प्रयोग शायद सिर्फ एक दिन का आयोजन हो, लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि रेलवे की पटरी अब बराबरी की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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